ya suturmurg ki tarah sir gada ke jina, pashuo ki tarah se jeewan jina.

आखरमाला

धर्म एवं अभिजन संस्कृति– – चार

जीवन की अंतहीन मुश्किलों से बचाव के लिए जनसाधारण के पास केवल तीन रास्ते होते हैं. पहला शराब की दुकान की ओर निकल जाना, दूसरा धर्म की शरण लेना और तीसरा सामाजिक क्रांति के रास्ते राह प्रशस्त करना.1मिखाइल बकुनिन

पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोप और एशियाई देशों में जो परिवर्तनकामी आंदोलन खड़े हुए उनमें परिस्थितिगत अंतर भले हो, मगर लक्ष्य सभी का कमोबेश एक था. वह अस्वाभाविक भी नहीं था. इसलिए कि अर्थव्यवस्था के वैकल्पिक साधनों के अभाव में सभी देशों की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित थी. कृषिकर्म के लिए सबको प्रकृति पर आश्रित रहना पड़ता था. हालांकि भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न थी और तज्जनित चुनौतियां भी. किंतु उत्पादन के साधनों में समानता के कारण उनके विकास का स्तर लगभग समान था. थोड़ाबहुत अंतर रहा तो उसका कारण भौगोलिक और स्थानीय…

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